स्त्रीधन: पत्नी की अपनी संपत्ति

स्त्रीधन परिवार द्वारा सँभालकर रखा गया उपहार नहीं है। वह पत्नी की अपनी संपत्ति है, और विवाह का जो भी हो, वह उसी की रहती है।

स्त्रीधन वह संपत्ति है जो किसी स्त्री को विवाह से पहले, विवाह के समय अथवा उसके बाद मिलती है: उसके अपने परिवार, संबंधियों और मित्रों से, तथा पति और ससुराल पक्ष से मिले गहने, नकद, वस्त्र, गृहस्थी का सामान और अन्य उपहार। वह पूर्णतः उसी की है। वह उसे अपनी इच्छा से उपयोग में ला सकती है, बेच सकती है अथवा दे सकती है, और पति तथा उसके परिवार का उस पर केवल इसलिए कोई अधिकार नहीं बनता कि वह उनके घर में ब्याही गई है।

सबसे अधिक भ्रांति अभिरक्षा को लेकर होती है। प्रायः गहने और उपहार वैवाहिक घर की किसी अलमारी में रखे जाते हैं, कभी ताले में, कभी सास की देखरेख में, और सभी उन्हें “घर का” कहने लगते हैं। किसी वस्तु को सँभालकर रखने से उसका स्वामी नहीं बदलता। पति अथवा ससुराल पक्ष उसे उसकी ओर से रखे हुए है, और यदि वे माँगे जाने पर उसे लौटाने से इनकार करें अथवा अपने प्रयोजन में लगा लें, तो न्यायालयों ने इसे ऐसा अनुचित कार्य माना है जिसका उपाय वह माँग सकती है, दीवानी और कुछ परिस्थितियों में आपराधिक भी।

स्त्रीधन दहेज से भिन्न है, यद्यपि दोनों को प्रायः एक समझ लिया जाता है। विवाह के संबंध में माँगा या दिया गया दहेज विधि द्वारा निषिद्ध है। स्त्रीधन वह है जो वधू को उसके अपने लिए दिया जाता है। जहाँ विवाह के समय संपत्ति पति अथवा उसके परिवार को सौंप दी गई हो, वहाँ विधि की अपेक्षा यह है कि वह उस स्त्री को दे दी जाए, रख न ली जाए। वह भरण-पोषण से भी भिन्न है, जो सहारा पाने का दावा है, तथा पति की संपत्ति में हिस्से से भी, जो अलग नियमों पर निर्भर है। स्त्रीधन का दावा पति की संपत्ति पर दावा नहीं है; वह उस वस्तु का दावा है जो आरंभ से उसी की थी।

ऐसे दावे प्रमाण पर टिकते हैं, और प्रमाण आरंभ में ही जुटाना सबसे सरल है। विवाह की तस्वीरें और वीडियो जिनमें गहने दिखते हों, सुनार के बिल, बैंक से निकासी और अंतरण, उस समय बनी उपहारों की सूची यदि कोई बनी हो, और वे संदेश जिनमें विशेष वस्तुओं का उल्लेख हो, यही सामान्य सामग्री है। जहाँ कोई स्त्री वैवाहिक घर छोड़ती है, वहाँ जो वह साथ ले गई और जो रह गया उसकी लिखित सूची, अधिमानतः किसी साक्षी के साथ, बाद की किसी भी स्मृति से अधिक मूल्यवान है। वस्तुओं अथवा उनके मूल्य की वापसी के लिए दीवानी वाद द्वारा उपाय माँगा जा सकता है, और स्त्रीधन प्रायः वैवाहिक कार्यवाहियों में किए जाने वाले दावों में सम्मिलित होता है। देखें वैवाहिक एवं पारिवारिक विधि।

यह टिप्पणी केवल सामान्य स्थिति बताती है। कोई विशेष वस्तु स्त्रीधन है या नहीं, और उसके लिए कौन-सा उपाय उपलब्ध है, यह तथ्यों तथा पक्षकारों पर लागू विधि पर निर्भर करता है, और यहाँ दी गई कोई बात विधिक सलाह नहीं है।

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